*खनुआ में 9 अगस्त को आयोजित होगा विशाल जनजाति सम्मेलन* “विश्व आदिवासी

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*खनुआ में 9 अगस्त को आयोजित होगा विशाल जनजाति सम्मेलन*

“विश्व आदिवासी दिवस” के अवसर पर 9 अगस्त 2018 को माटी कला मंच के द्वारा विशाल जनजाति सम्मेलन का आयोजन किया गया है जहां देश के जाने-माने जनजातीय समाजसुधारक शामिल होंगे कार्यक्रम के संयोजक व माटी कला मंच के अध्यक्ष माखनलाल प्रजापति ने बताया कि आदिवासी सम्मेलन में आसपास के 67 गांव से 7000 लोग शामिल होंगे जहां आदिवासियों की संस्कृति,रहन-सहन व लोक कला का प्रदर्शन किया जाएगा

*क्या है आदिवासी विश्व दिवस*

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरे विश्व में शांति स्थापना के साथ-साथ विश्व के देशों में पारस्परिक मैत्रीपूर्ण समन्वय बनाना,एक दूसरे के अधिकार एवं स्वतंत्रता को सम्मान के साथ बढ़ावा देना,विश्व से गरीबी उन्मूलन शिक्षा एवं स्वास्थ्य के विकास के उद्देश्य 24 अक्टूबर 1945 को “संयुक्त राष्ट्र संघ” की स्थापना किया गया भारत सहित वर्तमान में 193 देश इसके सदस्य हैं अपने गठन के 50 वर्ष बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने यह महसूस किया कि 21वीं सदी में भी विश्व के विभिन्न देशों में निवासरत जनजाति समाज अपनी उपेक्षा,गरीबी,अशिक्षा,स्वास्थ्य सुविधा का अभाव व बेरोजगारी एवं बंधुआ मजदूर जैसे समस्याओं से ग्रसित है जनजाति समाज के उक्त समस्याओं के निराकरण हेतु विश्व के ध्यानाकर्षण के लिए वर्ष 1994 में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासभा द्वारा प्रतिवर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने का फैसला लिया गया जिसके बाद विश्व के सभी महाद्वीपों में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस बड़ी जोर-शोर से मनाया जाता है जिसमें भारत प्रमुखता से शामिल है

*क्या है जनजाति सम्मेलन का उद्देश्य*

जनजाति संस्कृत सम्मेलन के संयोजक एवं माटी कला मंच के अध्यक्ष माखन लाल प्रजापति ने बताया कि इस सम्मेलन के माध्यम से हम लोगों से चर्चा करेंगे कि आदिवासी समाज कहां खड़ा है और मध्य प्रदेश में उनकी क्या स्थिति है,जल,जंगल और जमीन प्रारंभ से आदिवासी जीवन से जुड़ा रहा है समय के साथ बदलाव हुए हैं और यह समाज भी बदला है इस समाज के सामने बड़ी चुनौती है कि विकास का मॉडल क्या हो जिससे वे पिछ्ड़े भी नहीं और उनकी संस्कृति भी सुरक्षित रहे इस सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा की जाएगी कि आदिवासी समाज देश के मुख्यधारा से बाहर क्यों है..?

*प्रमुख कार्यक्रम*

खनुआ में आयोजित होने वाले जनजाति सम्मेलन में 48 गांव के 32 लोककला दल व 372 लोक कलाकार शामिल होंगे जहां जनजातियों के प्रमुख लोक नृत्य करमा,शैला,सुआ गीत,गुदुम बाजा आदि का प्रदर्शन किया जाएगा इसके अलावा संस्कार गीतों की भी प्रस्तुति होगी साथ ही कार्यक्रम में विभिन्न गांव से आए हुए लोग प्रकृति के देवता बड़ादेव का पूजन करेंगे व प्रसाद के रूप में भंडारे का आयोजन किया गया है

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