नगरीय चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश सरकार में हलचल शुरू, शिवराज ने पूरी की कमलनाथ की मुराद

सिंगरौली की आवाज़/ 15 जुलाई 2021

मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव उसी सिस्टम से होंगे जैसा कमलनाथ चाहते थे।अब महापौर और अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे। दूसरे शब्दों में हम ये कह सकते हैं कि नगर निगमों में महापौर व नगर पालिकाओं के अध्यक्ष को पार्षद चुनेंगे। दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में भी महापौर व निकाय अध्यक्ष ऐसे ही चुने जाते थे।


मध्य प्रदेश निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि प्रदेश में कोरोनावायरस नियंत्रण है वैक्सीनेशन की स्थिति को देखते हुए आम निर्वाचन कराया जाना संभव है उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना के कारण पहले से ही आम चुनाव बेहद लेट हो चुके हैं उन्होंने कहा कि पहले नगर निकायों के निर्वाचन करवाए जाएंगे निर्वाचन आयुक्त ने कहा प्रत्येक सेक्शन के कार्यों की समीक्षा की गई है नई अमिट स्याही खरीदने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं नगरी निकाय चुनाव में बनने वाले स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है

राज्य निर्वाचन आयुक्त बी.पी.सिंह ने बताया की नगरीय निकाय चुनाव पहले होंगे इसके बाद पंचायती चुनाव होंगे।


मध्य प्रदेश निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि प्रदेश में कोरोनावायरस नियंत्रण है वैक्सीनेशन की स्थिति को देखते हुए आम निर्वाचन कराया जाना संभव है उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना के कारण पहले से ही आम चुनाव बेहद लेट हो चुके हैं उन्होंने कहा कि पहले नगर निकायों के निर्वाचन करवाए जाएंगे निर्वाचन आयुक्त ने कहा प्रत्येक सेक्शन के कार्यों की समीक्षा की गई है नई अमिट स्याही खरीदने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं नगरी निकाय चुनाव में बनने वाले स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

दो चरणों मे हो सकते है मध्यप्रदेश के निकायी चुनाव

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 407 नगरीय निकाय हैं इनमें से 347 में निर्वाचन करवाना है जानकार यह भी बताते हैं कि यह चुनाव दो चरणों में हो सकता है । प्रथम चरण में 155 और द्वितीय चरण में 192 नगरीय निकायों में मतदान कराया जाएगा। 347 निकायों में 16 नगर निगम शामिल हैं यहां होने वाले सभी चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों के हिसाब से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि मध्य प्रदेश में जल्दी नगरी निकाय चुनाव हो सकते हैं। बता दे कि अभी 60 निकायों के कार्यकाल अभी बांकी है।

अप्रत्यक्ष प्रणाली का भाजपा ने किया था जमकर विरोध

महापौर और अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के कमलनाथ के फैसले को भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या बताया था और जमकर विरोध किया था। भाजपा के सभी पुराने महापौर इस फ़ैसले के खिलाफ तत्कालीन राज्यपाल लालजी टण्डन से मिले थे।

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