सिंगरौली। जिले के 382 पीडीएस दुकानों पर अन्न उत्सव कार्यक्रम, में गरीब – मजदूर व जरूरतमंदो कोअन्न उत्सव का नहीं मिला लाभ, बैरंग वापस लौटे

सुल्तान अहमद की रिपोर्ट/ सिंगरौली की आवाज़ 8 अगस्त 2021

उचित मूल्य की दुकानो मे अन्न उत्सव कार्यक्रम के दौरान सिंगरौली ज़िले की 382 पीडीएस दुकानों पर #उत्सवी_माहौल

  • सभी दुकानों को गुब्बारों और रंगोली बना कर सजाया गया

“अन्न उत्सव” के अवसर पर पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क में झोला से भरा 10 किलो चावल का हुआ वितरण

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना”* एवं “मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना” के तहत “अन्न उत्सव” कार्यक्रम जिले भर के शासकीय उचित मूल्य दुकान परिसर में टेंट – लाउडस्पीकर और टीवी स्क्रीन लगाकर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के भाषण का लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से आये हुये हितग्राहियों ने सुना एवं देखा गया ।

मध्य प्रदेश में जो अन्न महोत्सव का कार्यक्रम आज जगह जगह हुवे जिसका टाइम्स ऑफ इंडिया मे विज्ञापन छपा है। यह अख़बार दंभ भरता है कि उसके पाठक अमीर उपभोक्ता हैं। इसमें मर्सिडिज़ और करोड़ों के फ्लैट के विज्ञापन छपते हैं। इसके पन्नों पर ग़रीब कल्याण योजना का विज्ञापन देखकर गर्व महसूस हुआ। भारत की ग़रीबी अंग्रेज़ी हो गई है। अंग्रेज़ी में ग़रीबी का विज्ञापन आ रहा है। अगर मोदी न होते तो ग़रीबों को यह दर्जा कभी हासिल नहीं होता।

वही दूसरी तरफ सिंगरौली जिले में गरीब व जरूरतमंदो को “अन्न उत्सव” का नहीं मिला लाभ

उक्त कार्यक्रम स्थल पर बहुत से ऐसे गरीब हितग्राही आ गये थे जहां पर उनको कभी राशन मिला ही नही है जिनका राशन कार्ड व पात्रता पर्ची वगैरह नहीं है वह लोग आधार कार्ड लेकर राशन लेने के लिये लाइन में लगे देखे गये जब उनकी बारी आयी तो कहा गया कि जो हितग्राही पहले से लाभ ले रहे हैं एवं जो नये पात्र हितग्राही किसी अन्य योजना के तहत जो पंजीकृत हैं उन लोगों को राशन दिया जायेगा और ऐसे में बहुत से हितग्राही लाइन में लगकर बैरंग घर को वापस लौटना पड़ा जबकि वो गरीब एवं जरूरतमंद है उनको राशन का लाभ नही मिला है ।

सवाल यहाँ पर यह है कि जिन हितग्राहियों को पहले भी यह सुविधा मिलती थी हर माह और आगे भी मिलेगी नवम्बर माह तक फिर ये अन्न उत्सव का कार्यक्रम रख कर क्या कुछ नया किया सरकार ने ..?
जरूरत मन्द को आज भी नही मिल पा रहा है वो और कल भी नही मिला तो इस प्रकार का विज्ञापन कर के सरकार क्या दिखाना चाहती है जनता को। सत्ता किसी की भी होती ये काम तो पहले भी होता आ रहा है कि हितग्राहियों को राशन की सेवाएँ दी जाती थी।

वही दूसरी तरफ़ सिंगरौली जिले में सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों ने समाजसेवी के रूप में ससम्मान के साथ पात्र हितग्राहियों को माल्यार्पण कर नि:शुल्क में 10 किलो चावल का झोला में भरकर दिया गया ।

एक तरफ ग़रीबी बढ़ रही है दूसरी तरफ विकास के नाम पर उन चीज़ों पर ख़र्च हो रहा है जो देखने में भव्य हों

जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी की सरकार अलग अलग राज्यों में अन्न महोत्सव मना रही है। अब यह ग़रीब कल्याण योजना हर जगह दिखाई देगी। जब करोड़ों लोग प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर वाले झोले को लेकर चलते हुए दिखाई देंगे। उन झोलों पर मोदी ही चल रहे होंगे। तभी उनका सपना साकार हुआ है। लोगों को ग़रीब बनाकर उन्हें अपना झोला थमा कर ख़ुद सत्ता में बने रहने का यह आइडिया शानदार है। दुनिया में कहीं भी टीके के प्रमाण पत्र पर देश के प्रमुख की तस्वीर नहीं है। भारत में है। बहुत से लोग इससे परेशान थे कि प्रमाणपत्र पर मोदी जी की फोटो क्यों है? अब उन्हें इससे ख़ुश होना चाहिए कि घर घर में खूंटी पर मोदी जी झोला बन कर टंगे होंगे। मोदी जी ही झोला ले कर तो नहीं चल सके लेकिन यह बहुत बड़ी बात है कि वे झोला बन कर चल रहे होंगे। बस फ़कीर मोदी जी नहीं होंगे। फ़कीर वो जनता होगी जो हर दिन मोदी झोला लेकर चलती नज़र आएगी। कहीं पहुंचने के लिए नहीं बल्कि लौट कर उसी ग़रीबी में आने के लिए।

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