सिंगरौली। तीसरी लहर की आशंका के साथ जिला अस्पताल ट्रामा सेन्टर में कोरोना के लक्षण वाले बच्चे रोज हो रहें हैं भर्ती

सुल्तानअहमद की रिपोर्ट/ सिंगरौली की आवाज़* 08 सितम्बर 2021

तीसरी लहर की दस्तक के साथ जिला अस्पताल ट्रामा सेन्टर में कोरोना के लक्षण वाले बच्चे रोज हो रहें हैं भर्ती

एक तरफ़ प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका बढ़ गई है। दिगर शहरों में भी कोरोना के मरीज़ मिल रहे है जिससे प्रदेश में तीसरी लहर की चिंता सरकार को सता रही है। सिंगरौली जिले में बीमार बच्चों की तादाद बढ़ रही है इसमें अधिकांश बच्चों में कोरोना के लक्षण पाए जा रहे हैं। लेकिन अभी तक न ही कोरोना पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए न ही पीआईसीयू तैयार हो पाया है और न ही एचडीयू।

तीसरी लहर का इल्म पहले से था लेकिन क्या अनजान बना बैठा है प्रशासन ?

जिले में अभी तक तीन आक्सीजन प्लांट तो लगाएं गए है लेकिन इन्हें अभी तक चालू किया जा सका है।। अगर तीसरी लहर को नियंत्रित करना है तो कोरोना जाँच बढ़ाने के साथ ही अभी तैयारियां जल्द ही पूरी करनी होगी। विशेषज्ञों ने पहले ही ज़ेहन मे इस बात से अवगत करा दिया था कि तीसरी लहर सितम्बर माह तक आने के आसार है और ऐसे में जिला प्रशासन को सख्ते में आने की जरूरत है क्योंकि प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

बच्चों पर मौसम बीमारियों का प्रकोप

वतर्मान समय मे मौसम बीमारियों का प्रकोप पड़ता जा रहा है जिसमें बच्चें ज्यादातर प्रभावित हो रहें हैं और इन मौसमी बीमारियों के जद में आ रहे हैं। मंगलवार की सुबह तक जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर बैढ़न में 94 बच्चे भर्ती थे। इनमें ज्यादातर बुखार से हाई टम्प्रेचर मे हैं। भर्ती बच्चों में ज्यादातर बच्चो में कोरोना के लक्षण सामने आ रहे हैं। आधा दर्जन बच्चो को ऑक्सीजन सपोर्ट में रखना पड़ रहा है। ट्रामा सेंटर में पीआईसीयू एचडीयू से लेकर वार्डो में ऑक्सीजन सपोर्ट बेडों की सुविधा मुहैया कराने का आदेश राज्य स्तर से जून माह में ही आ गया था परन्तुं इनमें से कोई सुविधा यहाँ अभी चालू नही हो सकी है।

लेटलतीफ हो रहे कार्यों की वजह से आने वाले वक्त की मुसीबत की जिम्मेदारी कौन लेगा

ताज़ा जानकारी के अनुसार जो कार्य अभी चल रहे हैं इसे पूरा होने में सितम्बर माह भी पूरा निकल सकता है। पीआईसीयू का कार्य तो अभी आधा भी नही हो सका है और एचडीयू का कार्य आधा हो चुका है। जबकि वार्डो को सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई के साथ जोड़ने का कार्य भी पूर्ण नही हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि लेटलतीफी होने से आने वाले समय मे मुसीबतों की जिम्मेदारी किसकी होगी ? निर्माण कार्य करने वाले एजेसी या जिला प्रशासन..?

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